रामचरितमानस से ज्योतिषशास्त्र

रामचरितमानस से ज्योतिषशास्त्र को समझने का एक प्रयास..
सूर्य / मंगल ग्रह और रसिकता ??
जवाब देता है मानस
राम -सूर्य
सीता - मंगल
वन में एक बार जब दोनों अकेले बैठे हैं तब , दूसरी बार पुष्पक विमान से सीता के साथ वापस आते वक्त राम की रसिकता का बखूबी वर्णन है .राम फूलों से सीता को सजाते हैं , सीता को विशाल नयनो वाली बोलकर प्रेम पूर्वक बातें करते हैं .
हम कह सकते हैं ..
राम ( सूर्य ) + सीता ( मंगल ), वन ( सिंह राशि) में हो तब और फिर
सूर्य + मंगल ,तुला राशि ( पुष्पक विमान ) ,में हो तो व्यक्ति को रसिक बनाता है ..
या
सूर्य + मंगल + शुक्र , साथ हों तब व्यक्ति को रसिक बनाता है .
अलग अलग कालखंडों की पुनर्यात्रा करके ,बिखरे हुए मोती को इकट्ठा करके जरूरत है माला तैयार करने की ..
ग्रहों के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करने का..
समय की मांग Research का नही बल्कि Revisit का है ..

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